"डबिंग – दूर के ढोल सुहावने"

Hi I am Amit voice of, ummm voice of, वो….voice of… जी हाँ मैं चाहता हूँ ऐसा introduction देना…पर साला किसी को घंटा फ़र्क़ नहीं पड़ता. कभी कभी तो लगता है जैसे सिर्फ़ एक मैं ही इंसान हूँ (बाक़ी सब भगवान हैं ). फ़ोन की घंटी बजती है, मैंने फ़ोन उठाया “हेलो” “हेलो अमित, 5 घंटे का टाइम चाहिए एक फ़िल्म dub करनी है” “कब” “Friday 10-3” “ठीक है, भाई किस platform के लिए है…TV-broadcaster, OTT, DVD, theatre release” “TV है TV” “बजट क्या है” “फुलझड़ी ” “भाई इसमें तो, नहीं जलता मैं…sorry” “किससे आग लगाएगा?” “fire शॉट ” “अरे इतने में तो मैं ही – ‘आग लगा दूँगा, आग लगा दूँगा, आग लगा दूँगा ’ …ही-ही…चल रहने दे…किसी और को बुलाताहूँ, बड़ा आदमी हो गया तू, सब करते हैं इसी बजट में…चल रख फ़ोन ” इतना कह के उसने call काट दिया. इस मुद्दे पे बाद में लौट-ता हूँ. हाँ तो पब्लिक,  जिन लोगों को डबिंग इंडस्ट्री के बारे में नहीं पता, उन्हें बता दूँ. डबिंग मतलब – किसी दूसरे कलाकार के किरदार को अपनी आवाज़ से सजाना.
  • एक भाषा से दूसरी भाषा में डबिंग होती है.
  • Hollywood/ Foreign language फ़िल्में/ शोज़/ documentaries की डबिंग होती है.
  • भारत में ही अलग अलग भाषाओं में बनी films/serials की,  भारत की ही दूसरी भाषाओं में डबिंग की जाती है.
  • Ads(विज्ञापनों) की डबिंग होती है. (एक भाषा में शूट होके अक्सर दूसरी भाषाओं में डबिंग करवायी जाती है.)
और भी कयी परिभाषाएँ हैं डबिंग की,  गूगलवा से पूछो बता देंगे तुम्हें.
  • बड़े कलाकारों के पास शूट के बाद, रिकॉर्डिंग का टाइम नहीं होता, तो हु-ब-हु उनकी आवाज़ देने वाले आर्टिस्ट उनकीडबिंग करते हैं.
  • जब कोई अनपढ़ कलाकार का अमीर बाप, या जुगाड़ु हीरो/हीरोईन के director बिना ट्रेंड ऐक्टर को फ़िल्म में लॉंच करतेहैं, तो उनकी भी डबिंग होती है.
तो भाई डबिंग यानी वॉइस ऐक्टिंग, आवाज़ से ऐक्टिंग करने वाली चिड़िया का नाम है. बोलने के पैसे मिलते हैं डबिंग में. कभी कभी तो भौंकने के भी मिलते हैं…अरे सही कह रहा हूँ. एक बार मैं भी भौंका था, कुत्ते का रोल था. भाई बहुत टैलेंट है मुंबई के इंसानों में. चूहे, बंदर, बिल्ली, सब की डबिंग साला इंसान ही कर देता है. कभी कभी तो आहें भरने, साँस लेने, खाँसने, हँसने, रोने, के पैसे भी मिलते हैं. ग़ौर करना ‘पैसे’, ‘रुपय’ नहीं कहा मैंने. तो बात करते हैं उस फ़ोन कॉल की…जिसकी बातें मैंने आपको लिख के सुनायी. दरअसल जिसका फ़ोन आया था वो मेरा दोस्त ही है, शाम को मुझे वो बार में मिला. कहने लगा- “यार आजकल सब आर्टिस्ट का बजट का बड़ा इशू है. सबके भाव बड़े हुए हैं.” मैंने कहा- “हाँ जिनके भाव बड़े हैं, वो तो पता नहीं किस कोने पड़े हैं.  बिकते तो वही  हैं, जो सेल में ज़िंदगी जी रहे हैं ” “अबे डायलॉग मत मार…अपनी राइटिंग गिरी मत दिखा” “अरे क्यूँ ना दिखाऊँ…हर बार डाइयलॉग लिखने के पैसे नहीं लेता मैं.  हाँ राइटर हूँ, पर अपने टौंट मारने वाले डाइयलोगफ़्री में लिखता हूँ, अपने लिए.” “कुछ नहीं से अच्छा है थोड़ा बहुत” बिलकुल अच्छा है भाई…मैंने कब कहा अच्छा नहीं है. लेकिन कब तक ये अच्छा, अच्छा लगेगा…एक आर्टिस्ट जिसने 20-25 सालों से हज़ारों घंटों की डबिंग की है, और कई सौ characters को अपनी आवाज़ देता आया है, उसे तो बिलकुलअच्छा नहीं लगता अब. वैसे…सबसे अच्छा उनको लगता है जो बॉस कि गुड लिस्ट में आने के लिए और अपनी सैलरी बढ़ाने के लिए कलकारों कीबलि चढ़ा रहे हैं… आईला…सॉरी !!!! To be contd…

Date : 09-06-2020

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Shahid Imam
Shahid Imam
2020-06-10 11:50 am

Yahi to problem hai ke paise milte hain rupaye nahin milte…

Ketan Babaria
Ketan Babaria
2020-06-10 12:18 pm

Waah Bhai…true that…..

CHARU GUPTA
CHARU GUPTA
2020-06-10 2:47 pm

sacchai hai, isi baat se pareshan thi aapko phone karne wali thi ek din dard baantne ke liye

Ekta Tiwari
Ekta Tiwari
2020-06-14 12:53 am

 

Vikram Singh
Vikram Singh
2020-06-20 3:24 pm

Very true 👍

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